मोहाली

नशे की लाइफ लाइन:2 लाख लोग एक गोली के लिए रोज लगते हैं कतार में, क्योंकि, हेरोइन की लत छुड़ाने को दी जाती है ये कम डोज की गोली

जालंधर I पंजाब के ओट (आउटपेशेंट ओपियाड असिस्टेड ट्रीटमेंट) सेंटर में प्रतिदिन दो लाख लोग लाइन लगाते हैं। इन लोगों को बुप्रेनॉर्फीन/नालोक्सोन की गोली दी जाती है जो खतरनाक नशे का विकल्प होता है। इससे धीरे-धीरे नशा छोड़ने में सहायता मिलती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कर्फ्यू/ लॉकडाउन के दौरान पंजाब में 1.02 लाख लोगों ने हेरोइन (चिट्‌टा), पोस्त, स्मैक, नशीली गोलियां व कैप्सूलों से तौबा करते हुए ओट सेंटर में रजिस्ट्रेशन कराया है।

यह लोग सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक लाइन में लगकर नियमित गोली ले रहे हैं फिर चाहे तपती दोपहर हो या फिर बारिश। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पंजाब में 5.41 लाख नशा पीड़ित युवकों का इलाज हो रहा है। राज्य में 199 ओट सेंटर हैं, जिनमें 1,95,091 की रजिस्ट्रेशन हुई है।

हालात ऐसे… महिलाओं के लिए बना ओट सेंटर, 25 वर्ष तक की लड़कियां भी करा रहीं इलाज

प्रदेश में पुरुषों के अलावा महिलाओं द्वारा नशे करने के कई मामले आ चुके हैं। इसी के चलते सूबा सरकार ने कपूरथला में 26 जून 2018 को पहला सरकारी नवकिरण नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना की। अब तक यहां पर 155 लड़कियां नशे के इलाज के लिए एडमिट हो चुकी हैं।

इसमें से 80 लड़कियों की हालत इतनी खराब थी कि उन्हें नवकिरण केंद्र में एडमिट होना पड़ा। अभी वर्तमान में 7 लड़कियां यहां एडमिट होकर इलाज करवा रही हैं। अन्य मरीज यहां रोज गोली लेने आती हैं। सबसे बड़ी हैरानी वाली बात यह पाई गई कि यहां पर अब तक पहुंची 155 लड़कियों में सभी अविवाहित थीं जिनकी उम्र 25 साल से कम थी।

चिट्‌टे का विकल्प, धीरे-धीरे घटाया जाता है नशे का डोज

1. नशे का सेवन करने वालों को नशा छुड़ाओ केंद्र (ओट) में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद एक नंबर अलॉट किया जाता है।   2. सबसे पहले नशा लेने वाले की हिस्ट्री जांची जाती है। हेरोइन, स्मैक या अफीम का नशा लेता है तो वह कितनी डोज लेता है? 3. मरीज को हर दिन डोज के अनुसार बुप्रेनॉर्फीन/नालोक्सोन की गोली दी जाती है। सुधार होने पर डोज कम कर दी जाती है।  4. ओट सेंटर में मिलने वाली गोली  खतरनाक नशे का विकल्प होता है,जो धीरे-धीरे नशा छोड़ने में सहायक  होता है।  5.अलॉट किए गए नंबर से मरीज पंजाब के किसी भी ओट सेंटर में जाकर अपना रजिस्ट्रेशन नंबर बताने पर उसे उसकी डोज मिल जाती है। कुछ लोग जो ज्यादा नशा करते हैं उनकी स्थिति में सुधार न होने पर उन्हें नीरो सेंटर रेफर कर दिया जाता है।

-जसप्रीत सिंह (मेडिकल ऑफिसर, ओट सेंटर भागपुर) के अनुसार

मालवा में 80 हजार ने कराया रजिस्ट्रेशन

लॉकडाउन के 53 दिन में पंजाब में हेरोइन, स्मैक, पोस्त, नशीली गोलियां व अन्य नशा करने वाले लोगों को नशा नहीं मिला तो ये सभी ओट से जुड़ गए। सबसे ज्यादा मालवा के 14 जिलों में 80 हजार 290 लोग ओट सेंटर से जुड़े इसके बाद दोआबा के 4 जिलों में 12 हजार 198 लोग और फिर माझा के 4 जिलों से 9 हजार 755 लोग ओट सेंटर की शरण में पहुंचे।

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