चंडीगढ़

किसानों के अवरोध से लटक सकता है पंजाब में कटरा-दिल्ली एक्सप्रेस वे का काम

चंडीगढ़। तीन कृषि कानूनों के विरोध का असर पंजाब के सबसे प्रतिष्ठित कटरा-दिल्ली एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट पर भी पड़ना शुरू हो गया है। संगरूर जिले के किसानों ने इस प्रोजेक्ट के लिए तीनों कृषि कानूनों को रद करने तक जमीन न देने का ऐलान किया है। हालांकि, विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह विरोध केवल अपनी जमीन की कीमत ज्यादा से ज्यादा मिले, इसके लिए हो रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यह विरोध केवल संगरूर जिले में ही क्यों हो रहा है, जबकि एक्सप्रेस वे सात जिलों से होकर गुजरना है। छह में कोई खास दिक्कत नहीं आ रही है। पटियाला में मामूली विरोध हुआ था।

राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट के लिए जमीन देने से इन्कार कर रहे किसान

नेशनल हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया (एनएचएआइ) को इस प्रोजेक्ट के लिए पंजाब में 3200 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है, जिसमें से अभी तक 2300 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। संगरूर जिले की 600 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण बाकी है। शेष जमीन के लिए प्रक्रिया चल रही है। इस प्रोजेक्ट को 2023 में पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन जिस तरह से किसान इसका विरोध कर रहे हैं, उससे लगता है कि यह प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट लटक सकता है।

संगरूर में ही विरोध क्यों

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विरोध संगरूर में ही क्यों हो रहा है। दरअसल इस इलाके में वामपंथी विचारधारा वाले किसानों की संख्या ज्यादा है। भूमि अधिग्रहण का काम करने में जुटी एनएचएआइ की टीम को भी किसानों ने घेर लिया। सर्वे के लिए आए अलग-अलग कंपनियों के कर्मचरियों को किसान छह बार जबरन अपने धरने में बैठा चुके हैं। अभी तक किसी किसान पर केस भी दर्ज नहीं हुआ है। उनके काम में बाधा पहुंचाई जा रही है।

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